क्या करें

इन वर्षों में,  दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग बस्तियों में रहते है तथा बड़े पैमाने पर इनको बेदखल किया जाता रहा हैं जोकि बिना किसी नोटिस या उचित सूचना होने के बावजूद होता हैं। स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कानून,  उन लोगो के अधिकारों की रक्षा करते हैं जो बस्तियों में रहते हैं | बस्तियों में रह रहे लोगो को निष्कासन के खतरे का सामना करना पड़ सकता है। अगर किसी को बेदखल किया गया हो या बेदखली का खतरा हो तो नीचे लिखे अधिकारों की सूची का सहारा लें:

बस्ती में रहनेवालों के अधिकार:

विभिन्न कानूनों और नीतियों के तहत बस्ती वासियों को निम्नलिखित अधिकारों की गारंटी दी गई है| इनमें भारत का संविधान, दिल्ली स्लम और जे. जे. पुनर्वास और पुनर्वास नीति 2015, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले और दिल्ली उच्च न्यायालय (कृपया संसाधन देखें) विस्तृत जानकारी के लिए वेबसाइट का अनुभाग (Please see the resources section of the website for detailed information) शामिल है |

  1. पहले से बेदखली के बारे में नोटिस प्राप्त करने का अधिकार। लोगों को यह जानने का भी अधिकार है कि बेदखली किस उद्देश्य से की जा रही है, और किस सार्वजनिक उद्देश्य के लिए उक्त भूमि की आवश्यकता है।
  2. यदि कोई परिवार /व्यक्ति 2015 से पहले बस्ती में रह रहा है तो वह एक उपयुक्त आवास में पुनर्वास प्राप्त करने का अधिकार रखता है | पात्रता के लिए मानदंडों की एक विस्तृत सूची के लिए, कृपया यहां DUSIB 2015 नीति देखें।(Mayank please add hyperlink of DUSIB 2015 policy here.)
  3. सरकार को निष्कासन से पहले कानून के अनुसार एक सर्वेक्षण करना चाहिए । तथा पात्रता सूची को प्रकाशित करना चाहिए | और जो लोग अपात्र पाए जाते हैं, उन्हें दुबारा अपील करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
  4. सरकार को पुनर्वास / इन-सीटू(जहाँ झुग्गी वही मकान) के लिए उपयुक्त योजना का निर्धारण करने के लिए संबंधित समुदाय के साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। वैकल्पिक आवास या तो बेदखली के स्थान पर या निवास के मूल स्थान से 5 किलोमीटर के दायरे में प्रदान किया जाना चाहिए। केवल असाधारण परिस्थितियों में बोर्ड 5 किमी के दायरे से परे आवास को मंजूरी दे सकता है।
  5. जब उपरोक्त प्रक्रिया का पूर्ण रूप से पालन किया जाये, तभी पुनर्वास निष्कासन से पहले होना चाहिए |
  6. उपरोक्त सभी अधिकार बस्ती के लोगों के पास होते हैं, चाहे भूमि किसी की/कोई भी हो |
  7. बोर्ड परीक्षा के समय, या अत्यधिक ख़राब मौसम की स्थिति के दौरान तथा  रात में, तोड़-फोड़ नहीं की जा सकती। बेदखली के दौरान DUSIB को पानी, स्वच्छता और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करानी होती हैं |
  8. पुनर्वास स्थल पर, सभी उपयुक्त सरकारी सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए, जिनमें आसपास के स्कूलों में बच्चों के प्रवेश की सुविधा, आसपास के क्षेत्र में एक औषधालय / मोहल्ला क्लिनिक, आसपास के क्षेत्र में राशन की दुकान आदि, और लोगों के लिए पीने के पानी और सीवेज सुविधाओं की उपलब्धता होनी चाहिए|

शहर पर सभी लोगो का सामान्य अधिकार हैं  इसलिए शहरो के निवासियों को वर्तमान तथा भविष्य में शहर को एक अच्छे और टिकाऊ शहर के रूप में देखना/परिभाषित करना चाहिए , तथा शहर में रहने और उसको बनाने का पूर्ण अधिकार हैं।

बेदखली से पहले के पहलु

कुछ ही स्थितियों में बस्ती को  बेदखली के पहले नोटिस दिया जाता है| ज़्यादातर यही पाया जाता है कि नोटिस या तो अपर्याप्त है, या बस्ती के सभी रहवासियों को नहीं दिया गया है, या जितना समय दिया गया हो वो काफी नहीं है| इस तरीके से दिए गए नोटिस अपना मकसद ही पूरा नहीं करते| नोटिस मिलते ही कुछ चीज़ों पर जल्द से जल्द ध्यान देना चाहिए| इस के लिए, नीचे लिखी जानकारी का सहारा लिया जा सकता है|

  1. जैसे ही नोटिस मिलता है, तुरंत अपनी बस्ती में रहने वाले ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को इकठ्ठा करके मीटिंग करें| और कोशिश करे कि लोगों में ज्यादा घबराहट न हो, और सब एकत्रित होकर एकता बनाये रखें| यह काफी ज़रूरी है|
  2. लोकल एन जी ओ/ सामाजिक कार्यकर्ता/ पुलिस स्टेशन/ विधयक/पार्षद से संपर्क करें और नोटिस के बारे में सही जानकारी इकट्ठा करें| ध्यान रखें की यह जानकारी सही सूत्रों से आ रही हो, ताकि झूठी खबरें न बनें| ज़्यादा जानकारी मिलने पर आगे के कदम तय हो पाएंगे| सामजिक कार्यकर्ता, वकील, एन जी ओ की सूची के लिए यह भाग देखें|(contact information of Activists, Lawyers, & NGOs, please visit this section - Mayank please hyperlink the contact section here)
  3. इस जानकारी को लेकर वकील से संपर्क करें और मिलने जाएँ| वकील के साथ की मीटिंग के लिए नीचे दिए गए सभी डाक्यूमेंट्स, कागज़ात लेके आएं :
  4. सरकारी पहचान पत्र, आई डी कार्ड और 2015 से पहले का कोई ऐसा कार्ड जो सबूत हो की आप २०१५ से पहले से बस्ती में रह रहे हैं| उदाहरण: वोटर कार्ड, राशन कार्ड, टेलीफोन बिल, बिजली बिल, स्कूल से सर्टिफिकेट, बच्चों और बड़ों का जनम प्रमाण पत्र आदि |
  5. अभी और इससे पहले दिए गए सभी नोटिसस की कॉपी जो आपकी बस्ती को बेदखली के संद्दर्भ में मिली हों |
  6. बस्ती के इतिहास से सम्बंधित कोई भी जानकारी, की बस्ती कब से और कैसे पनपी इस जगह| जिस संस्था की ज़मीन है, उस बारे में अगर कोई जानकारी हो तो वो भी ले कर जाएं|
  7. अगर इससे पहले कोई भी कोर्ट कचेहरी के कागज़ात हों बस्ती के तो उन्हें ले जाएं |
  8. कोई भी और कागज़ात जिससे ज़मीन की मालिकी जानकारी मिल पाए|
  9. बस्ती में से कुछ लोगों को चुन लें जो तुरंत कुछ करने की ज़रुरत पड़ने पर याचिकाकर्ता बन पाएं| इन लोगों का वकील के साथ की मीटिंग में उपस्थित होना ज़रूरी है|
  10. यह ज़रूरी है की नोटिस मिलने पर स्टे आर्डर प्राप्त करें (सामान्य रूप से हाई कोर्ट से मिलता है) | स्टे आर्डर के होने पर सरकार बेदखली नहीं कर सकती|

बेदखली के दौरान

  1. लोकल एन जी ओ/ सामाजिक कार्यकर्ता/ पुलिस स्टेशन/ एम् एल ऐ से संपर्क करें  जल्द से जल्द आने को कहें| (for contact information of Activists, Lawyers, & NGOs, please visit this section - Mayank please hyperlink the contact section here)
  2. यह ज़रूरी है की बस्ती वालों की सुरक्षा हो, खासकर की गर्भवती विकलांग, बीमार, औरतें, बच्चे और बूढ़े।
  3. बेदखली करते हुए सरकारी कार्यकर्ताओं को पूछें की वे किसके आदेशों का अमल कर रहे हैं| कोशिश करें की अफसरों से बेदखली के सन्दर्भ में लिखित लेटर मांगे|
  4. यह पहचानने की कोशिश करें की कर्मचारी और अफसर कौनसे विभाग से हैं और कौनसी संस्था से हैं| नोट करें की कितने अफसर आये हैं और उन में से कितनी औरतें हैं|
  5. ध्यान रखें की सभी कागज़ात, डॉक्यूमेंट, पहचान पत्र आपके पास सुरक्षित रहे ताकि ज़रुरत पड़ने पर इन्हे अफसरों को दिखा पाएं|
  6. बेदखली की प्रक्रिया को किसी भी तरीके (जैसे फोटो, वीडियो, वौइस् रिकॉर्डिंग ) से दर्ज करें|
  7. दिल्ली हाई कोर्ट से उसी दिन के अंदर भी अनुरोध किया जा सकता है ताकि स्टे आर्डर मिल जाए और बेदखली रोकी जा सके|